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फैसिलिटी और सिक्योरिटी की कमी झेल रहीं RIMS नर्सिग स्टूडेंट्स

-रिम्स की बीएससी नर्सिग स्टूडेंट्स 20 दिनों से झेल रही हैं पानी की किल्लत

-गंदा पानी पीने को हैं मजबूर, लाइन लगाकर भरना पड़ता है पानी

-छोटी दीवार होने का फायदा उठाकर कैंपस में घुसते हैं बाहरी लोग

 

बीस दिनों से पानी नहीं आया है. पीने के लिए हमें गंदे पानी का ही सहारा लेना पड़ रहा है. कम्प्लेन करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती है. यही नहीं, इस हॉस्टल में बाहर के लोग आ जाते हैं. हमें बहुत डर लगता है. यह कहना है रिम्स में बीएससी नर्सिग की फ‌र्स्ट ईयर की स्टूडेंट्स का. सभी स्टूडेंट्स बुधवार को रिम्स के डायरेक्टर से इसकी कम्प्लेन करने गई थीं और आश्वासन लेकर लौटीं.

 रिम्स में बीएससी नर्सिग की फ‌र्स्ट ईयर की  स्टूडेंट्स के लिए सिर्फ एक नल है, जिसमें पानी आता है. इसके भरोसे ये पिछले 20 दिनों से हैं. बाकी कामों के अलावा पीने के लिए भी ये स्टूडेंट्स इसी नल के पानी पर निर्भर हैं. अगर टाइम से पानी नहीं लिया, तो वह भी नहीं मिलता है. जबकि, पहले ऐसा नहीं होता था. यहां हॉस्टल की छत पर टंकियां लगी हुई थीं, जिसमें पानी स्टोर होता था और पीने के लिए वाटर प्यूरीफायर भी लगाया गया था. लेकिन, अब टंकी पूरी तरह से टूट चुकी है और प्यूरीफायर गायब हो गया है. इसके बाद से यहां स्टूडेंट्स पानी की किल्लत झेल रही हैं.

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कैंपस में घुस जाते हैं बाहरी लोग

नर्सिग फ‌र्स्ट ईयर की स्टूडेंट्स दिनभर तो क्लास और प्रैक्टिस में लगी रहती हैं, लेकिन रात में इन्हें अपने हॉस्टल में आने में डर लगता है. इसके कैंपस के पीछे की बाउंड्री वॉल इतनी छोटी है कि कोई भी इसे आसानी से पार कर सकता है. इन स्टूडेंट्स का कहना है कि कई बार तो बाहरी लड़के बाउंड्री पार करके कैंपस अंदर आ जाते हैं, जिसके कारण इन स्टूडेंट्स को हमेशा डर बना रहता है कि कहीं कोई अंदर न घुस जाए. पूरे कैंपस में ब्8 स्टूडेंट्स रहती हैं और इनकी सिक्योरिटी के लिए सिर्फ एक गार्ड है. यही नहीं, कैंपस के बाहर वाले रास्ते पर बैठकर लड़के शराब भी पीते हैं और बोतल यहीं फेंक देते हैं.

प्रिंसिपल को नहीं है कोई मतलब

स्टूडेंट्स का कहना है कि नर्सिग कॉलेज की प्रिंसिपल ममता टोप्पो को न तो कॉलेज की किसी प्रॉब्लम से मतलब है और न ही हॉस्टल में रह रहीं स्टूडेंट्स की प्रॉब्लम से. सभी स्टूडेंट्स ने प्रिंसिपल से कई बार पानी और सिक्योरिटी के बारे में कहा, तो उनका जवाब था कि बात करते हैं, लेकिन आज तक बात नहीं हुई. सिर्फ आश्वासन मिलता रहा और कॉलेज ऐसी ही परेशानी से चलता रहा है.

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स्टाइपेंड भी नहीं मिला है students को

नर्सिग की फ‌र्स्ट ईयर की स्टूडेंट्स ने अक्टूबर में एडमिशन लिया था. अब छह महीने से ज्यादा समय हो गया, लेकिन अभी तक इनमें से किसी भी स्टूडेंट को स्टाइपेंड नहीं मिला है. इसके लिए जब इन्होंने प्रिंसिपल से बात की, तो उनका कहना था कि जब जॉब में आओगी, तब स्टाइपेंड मिलेगा.

आनेवाली है आईएनसी की टीम

रिम्स के नर्सिग कॉलेज का इंस्पेक्शन करने के लिए इंडियन नर्सिग काउंसिल (आईएनसी) की टीम दो से तीन दिनों के अंदर आनेवाली है. रिम्स में चल रहे इस नर्सिग कॉलेज को मान्यता मिलना बाकी है. इसके लिए ही आईएनसी की टीम यहां इंस्पेक्शन करने आनेवाली है. लेकिन, फिलहाल हालत ऐसी है कि अगर इसे टीम देख ले, तो कभी एफिलिएशन ही नही मिलेगा.

'पानी की समस्या तो नर्सिग हॉस्टल की दूर कर दी जाएगी और पानी मिलने लगेगा. लेकिन, जो बात बाउंड्री वॉल की है, तो यह पहले क्वार्टर बनाया गया था और बाद में इसे हॉस्टल बना दिया गया. हमने सिक्योरिटी और बढ़ा दी है. बाउंड्री वॉल के लिए प्रपोजल बनाकर आगे बढ़ाया जाएगा.' --डॉ एसके चौधरी,एक्टिंग डायरेक्टर, रिम्स
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