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अपनी ही डिग्री का रिम्स में वजूद नहीं

अपनी ही डिग्री का रिम्स में वजूद नहीं
रांची, प्रतिनिधि : अपनी ही डिग्री का रिम्स में कोई वजूद नहीं। अगर रिम्स में रिक्तियां भी निकलें, तो उसमें यह लिखित होता है कि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) की मान्यता वाली डिग्रियां ही मान्य होंगी। लेकिन, एमसीआई की टीम जब भी भ्रमण करने पहुंची, वह विभाग उसके मानक पर खरा नहीं उतरे और नहीं मिल सकी मान्यता। गत वर्ष ही एफएमटी और न्यूरो विभाग को एमसीआई की मान्यता मिली थी। लेकिन, अब भी दूसरे विषयों के सैकड़ों ऐसे विद्यार्थी हैं, जिनका भविष्य वर्षो से एमसीआई की मान्यता के अभाव में लटका हुआ है। आर्थोपेडिक विभाग में कुछ वर्षो से पढ़ाई ही बंद हो गई। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) की टीम जब आर्थो का भ्रमण करने पहुंची, तो वहां फैकल्टी की कमी पाई। एमसीआई का तर्क था कि जब यहां शिक्षक ही नहीं हैं, तो विद्यार्थियों को पढ़ाएगा कौन। इसके बाद से ही आर्थो की डिग्री बंद हो गई। अब पुराने चिकित्सकों के भरोसे ही चल रही है पढ़ाई। अब भी आर्थो का मानक पूरा नहीं हो पाया है। वैसे विभाग, जिन्हें नहीं है एमसीआई की मान्यता रेडियोलोजी : डिग्री व डिप्लोमा दोनों। डीटीएमच : डिप्लोमा इन ट्रापिकल मेडिसिन एंड हाइजिन। डीसीपी : डिप्लोमा इन क्लिनिकल साइकोलाजी। आर्थो : फैकल्टी की कमी की बात कह पूरी तरह से कर दिया गया बंद। एनेस्थीसिया : डिग्री एंड डिप्लोमा का था मामला।Source:Prabhat Khabar-Ranchi 12.08.09

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